आँखें नम हैं,भारी मन
युग पुरूष को शत-शत नमन
दुखी है सारा जन-गण-मन
खो गये वह भारतरत्न
याद आ रहे सारे राॅकेट याद आ रहा पोखरण
नभ को चिरती मिसाइलें यादगार सभी भाषण। द्रवित पूरा राष्ट्र हमारा,
स्तब्ध राष्ट्रपति भवन।
आँखें नम हैं,भारी मन,
युग पुरुष को शत-शत नमन।
Poem by Aiyaz & Friend
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युग पुरूष को शत-शत नमन
दुखी है सारा जन-गण-मन
खो गये वह भारतरत्न
याद आ रहे सारे राॅकेट याद आ रहा पोखरण
नभ को चिरती मिसाइलें यादगार सभी भाषण। द्रवित पूरा राष्ट्र हमारा,
स्तब्ध राष्ट्रपति भवन।
आँखें नम हैं,भारी मन,
युग पुरुष को शत-शत नमन।
Poem by Aiyaz & Friend
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Miss u sir
ReplyDeleteहम सभी देशवाशियों को बहुत कमी खल रही है।
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteThanks
DeleteWe miss you sir .
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